विधानसभा चुनाव: 5 राज्यों में PM मोदी ने 32 तो राहुल गांधी ने कीं 77 रैलियां

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, मिजोरम और तेलंगाना के विधानसभा चुनाव में जमकर प्रचार किया। भले ही चुनाव प्रचार पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के लिए हुआ लेकिन कांग्रेस और भाजपा ने लोकसभा चुनाव की नींव भी तैयार कर दी है। जहां एक तरफ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का पूरा फोकस नरेंद्र मोदी और उनके वादों-जुमलों पर रहा तो वहीं प्रधानमंत्री ने भी अपनी चुनावी सभाओं में राहुल गांधी का नाम लेकर हमले बोले।

मोदी ने की 32 और राहुल ने 77 रैलियां
मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और मिजोरम में मतदान हो चुके हैं जबकि राजस्थान और तेलंगाना में 7 दिसंबर को वोटिंग होगी। मोदी और राहुल दोनों ने ही पांचों राज्यों में ताबड़तोड़ चुनाव प्रचार किया। हालांकि इस बार राहुल गांधी पीएम मोदी से आगे निकल गए। जहां एक तरफ प्रधानमंत्री ने पांच राज्यों में महज 32 रैलियां कीं वहीं राहुल ने 77 चुनावी जनसभाओं को संबोधित किया।

5 राज्यों में मोदी-राहुल की रैलियों पर एक नजर
राजस्थान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 चुनावी रैलियों को संबोधित किया। मध्य प्रदेश में 10, छत्तीसगढ़ में 4, तेलंगाना में 5 और मिजोरम में एक ही रैली को संबोधित किया। जबकि राहुल गांधी ने राजस्थान में सात, मध्य प्रदेश में 21, राजस्थान में 20, छत्तीसगढ़ में 21 , तेलंगाना में 14 और मिजोरम में 2 रैलियों को संबोधित किया। बता दें कि मध्य प्रदेश में 230 सीटें, राजस्थान में 200 सीटें, छत्तीसगढ़ में 90, तेलंगाना में 119 में और मिजोरम में 40 सीटें हैं।

अकेले गुजरात में मोदी ने की थी 34 रैलियां
इस चुनावी मौसम में जो सबसे हैरान करने वाली बात थी वो यह कि पीएम मोदी ने इन पांच राज्यों में बहुत ही कम रैलियां कीं। विश्लेषकों का मानना है कि राज्यों में भाजपा की कमजोर स्थिति को देखते हुए मोदी की रैलियों की संख्या कम की गई ताकि हार की स्थिति में ठीकरा प्रधानमंत्री पर न फूटे। पिछले विधानसभा चुनावों की तुलना में इस बार मोदी ने कम ही चुनावी बिगुल फूंका। यहां बता दें कि मोदी ने गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान अकेले इसी राज्य में 34 चुनावी जनसभाएं की थीं। गुजरात में 182 विधानसभा सीटों पर चुनाव के लिए मोदी ने अपनी पूरी ताकत लगा दी थी। हालांकि इसका एक अर्थ यह भी निकाला जा रहा है गुजरात में स्थिति भाजपा के हाथ से बाहर हो रही थी इसलिए इसकी बागडोर मोदी ने अपने हाथ में ली। जबकि राहुल गांधी ने गुजरात में बहुत कम रैलियां की थीं। पांचों राज्यों के विधानसभा चुनावों के परिणाम 11 दिसंबर को आने हैं, उसके बाद ही तस्वीर साफ होगी कि राहुल ज्यादा रैलियां करके बाजी पलट गए या फिर मोदी ने 32 रालियों के जरिए ही चुनावी फिजा बदल दी।

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