मानवता का घिनौना चेहरा हुआ वायरल, नाबालिग मानसिक रोगी को बेरहमी से घसीट कर पीटा

ग्वालियर: कहते हैं कि अस्पताल में हर दर्द की दवा होती है लेकिन मध्यप्रदेश के अस्पतालों में मरीज को ठीक करने की बजाय जख्म देने का मामला सामने आया है। घटना में एक नाबालिग मानसिक रोगी को बेरहमी से घसीट घसीटकर पीटा गया है। मासूम दर्द से चिल्लाता रहा, लेकिन कर्मचारियों को बिल्कुल भी रहम नहीं आया। गनीमत यह रही कि कर्मचारिओं का यह घिनौना चेहरा सीसीटीवी में कैद हो गया।  वायरल होने के बाद जयारोग्य अस्पताल प्रबंधन हरकत में आया। मासूम से मारपीट की घटना के बाद ड्यूटी पर मौजूद दो गार्डों को नौकरी से हटा दिया गया। जबकि सफाई दी गई कि ट्रॉमा सेंटर में लावारिस मरीज को काट लिया था, इसलिए उसे पकड़ा गया।

जानकारी के अनुसार, ट्रॉमा सेंटर में मंगलवार को 13-14 साल का एक नाबालिग मानसिक रोगी दाखिल हो गया। मासूम के तन पर केवल एक पेन्ट था। गार्डों के रोकने के बाद भी जब वह अंदर दाखिल हो गया तो ड्यूटी डॉक्टरों ने कर्मचारियों को फटकार लगाते हुए बाहर निकालने के निर्देश दिए। इसके बाद कर्मचारियों ने मानवता की सारी हदों को लांघते हुए मासूम को घसीटकर ट्रामा सेंटर के गेट के बाहर ले गए, जब वह जान बचाकर अंदर की तरफ भागा तो दोबारा उसे पकड़ लिया। लहूलुहान मासूम दर्द के कारण चिल्ला रहा था, लोगों की आंखों में उसकी यह हालत देख आंसू आ गए।

हद तो तब हो गई जब वहां मौजूद लोगों ने कर्मचारियों से कहा भी कि वह पहले से परेशान है, एक हाथ नहीं है, उसको छोड़ दो। मगर कर्मचारियों ने उनकी बात को नजरअंदाज कर बेरहमी से घसीटने का दौर जारी रखा। लोगों ने इसका वीडियो बनाकर वायरल किया तो जेएएच प्रबंधन के होश उड़ गए। आनन फानन ड्यूटी पर मौजूद दो गार्ड सुल्तान बघेल एवं कमल किशोर को नौकरी से हटाने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। मारपीट करने वाला खुद को कर्मचारी बता रहा था, जबकि अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक वीडियो में दिखाई देने वाला कोई अटेण्डेंट था।

इंसानियत को शर्मसार करने वाला यह वीडियो जब सोशल मीडिया में फैला तो जिला प्रशासन के वरिष्ठ अफसरों तक भी पहुंच गया है। हालांकि पीएमओ तक इसकी शिकायत हुई है। वहीं जेएएच अधीक्षक का कहना है कि मारपीट करने वाले अस्पताल के गार्ड या कर्मचारी नहीं है, वह कोई अटेंडेंट है।

ट्रामा सेंटर में मौजूद लोगों ने बताया कि  नाबालिक मानसिक रोगी को 108 एम्बुलेंस छोड़ गई थी। इसके बाद उसे पट्टी से बांधकर बाहर लेटा दिया गया था। वह इधर से उधर भटक रहा था। जबकि डॉ. अशोक मिश्रा, अधीक्षक जेएएच ने सफाई पेश की है कि गार्डों ने मारपीट नहीं की है, अटेंडेंट ने मानसिक रोगी को पीटा है। क्योंकि उसने कई व्यक्तियों को काट लिया था। गार्डों को इसलिए हटाया गया है क्योंकि उनके द्वारा मानसिक रोगी को अंदर जाने से नहीं रोका गया। साथ ही जब अटेंडेंट पीट रहे थे तो उनको रोका क्यों नहीं गया। रोगी का मनोरोग विशेषज्ञ से बुलाकर इलाज करा दिया है। साथ ही मनोरोगी को कपड़े भी डॉक्टरों ने ही उपलब्ध कराए हैं।

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