SC में बोली मोदी सरकार-राफेल पर CAG रिपोर्ट दाखिल करने में हुई चूक, गलती से रह गए 3 पन्ने

नई दिल्लीः लोकसभा चुनाव से पहले एक बार फिर राफेल विमान सौदे में कथित गड़बड़ी का मामला गरमा गया है। सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को राफेल डील पर पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान एजी केके वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट से कहा, राफेल पर कैग रिपोर्ट दाखिल करने में चूक हुई। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में शुरुआती तीन पेज शामिल नहीं थे। इसपर सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा कि आप दस्तावेज़ों के विशेषाधिकार की बात कर रहे हैं, इसके लिए आपको सही तर्क पेश करने होंगे। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति केएम जोसेफ की पीठ के समक्ष केन्द्र की ओर से अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने अपने दावे के समर्थन में साक्ष्य कानून की धारा 123 और सूचना के अधिकार कानून के प्रावधानों का हवाला दिया। बता दें कि इससे पहले सरकार इसी कैग रिपोर्ट में गलती की बात कह चुकी थी, जिसके बाद ही इस पुनर्विचार याचिका को दाखिल किया गया था। पिछली कैग रिपोर्ट के आधार पर ही मोदी सरकार को सुप्रीम कोर्ट से क्लीन चिट मिली थी। अटॉर्नी जनरल वेणुगोपाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को समीक्षा याचिकाओं से लीक हुए पन्नों को हटाने का निर्देश देना चाहिए।

कोर्ट की कार्रवाई पर एक नजर

  • वेणुगोपाल ने आरटीआई एक्ट का तर्क दिया और कहा कि सुरक्षा से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती हैं। राष्ट्र की सुरक्षा सर्वोपरि है। इस दलील पर जस्टिस केएम जोसेफ ने कहा कि जिन संस्थानों में ऐसा नियम है और अगर भ्रष्टाचार के आरोप हैं तो जानकारी देनी ही पड़ती है।
  • वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में तर्क दिया कि अगर राफेल के कागज चोरी हुए थे तो सरकार ने एफआरआई दर्ज क्यों नहीं कराई। सरकार अपनी जरूरतों के अनुसार इन दस्तावेजों का खुलासा करती रही है। कैग रिपोर्ट में क्या होगा, इसकी जानकारी सरकार को कैसे पता।
  • प्रशांत भूषण ने न्यायालय से कहा कि राफेल के जिन दस्तावेजों पर अटार्नी जनरल विशेषाधिकार का दावा कर रहे हैं, वे प्रकाशित हो चुके हैं और सार्वजनिक दायरे में हैं।
  • सूचना के अधिकार कानून के प्रावधान कहते हैं कि जनहित अन्य चीजों से सर्वोपरि है और खुफिया एजेन्सियों से संबंधित दस्तावेजों पर किसी प्रकार के विशेषाधिकार का दावा नहीं किया जा सकता: भूषण
  • भूषण ने कहा कि राफेल के अलावा ऐसा कोई अन्य रक्षा सौदा नहीं है जिसमे कैग की रिपोर्ट में कीमतों के विवरण को संपादित किया गया।
  • सुप्रीम कोर्ट ने भूषण से कहा कि हम केंद्र की प्रारंभिक आपत्ति पर फैसला करने के बाद ही मामले के तथ्यों पर विचार करेंगे।
  • भूषण ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि भारतीय प्रेस परिषद अधिनियम में पत्रकारों के सूत्रों के संरक्षण के प्रावधान हैं। भूषण ने कहा कि राफेल सौदे में सरकार और सरकार के बीच कोई करार नहीं है क्योंकि इसमें फ्रांस ने कोई संप्रभू गारंटी नहीं दी है।

यह पीठ राफेल विमान सौदे के मामले में अपने फैसले पर पुर्निवचार के लिए दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। ये पुर्निवचार याचिका पूर्व केन्द्रीय मंत्रियों यशवंत सिन्हा और अरूण शौरी तथा अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने दायर कर रखी हैं। बुधवार को रक्षा मंत्रालय ने राफेल पर हलफनामा दायार किया था।

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