सिक्किम में फंसे पर्यटकों के लिए देवदूत बनी सेना

दार्जिलिंग: सिक्किम में भारी हिमपात के कारण लाचुंग में फंसे 150 से अधिक पर्यटकों को सेना ने सुरक्षित बचा लिया है। ठीक दस दिन पहले ही सेना ने नाथुला, सांगो तथा अन्य स्थानों पर करीब 3000 पर्यटकों को सुरक्षित बचाया गया था।  चीन की समी के पास स्थित लाचुंग 2700 मीटर की उंचाई पर स्थित पहाड़ी गांव है जहां भुटिया तथा तिबती लोग निवास करते हैं। सिक्किम की राजधानी गंगटोक से इस गांव की दूरी 100 किलोमीटर से अधिक है। बुधवार को दोपहर बाद इस प्रसिद्ध पर्यटन स्थल पर भारी हिमपात हुआ तथा तापमान शून्य से नीचे जा पहुंचा जिसमें 150 पर्यटक भी फंस गए।  राहत कार्याें से जुड़े आधिकारियों ने बताया कि महज दो घंटे के भीतर पूरी लाचुंग घाटी पूरी तरह से कट गई तथा सभी प्रकार के संपर्क भी टूट गए। पर्यटक, जिनके पास खराब मौसम की स्थिति में जीवित रहने के लिए अपने स्वयं के पर्याप्त साजो-सामान तक नहीं थे, संकट में थे और उन्हें तत्काल सहायता की आवश्यकता थी।

तुरंत हरकत में आईं सेना
सेना की त्रिशक्ति कोर की टुकड़यिां तुरंत हरकत में आईं और ‘क्विक रिएक्शन टीमों’ तथा अपने चिकित्सा कर्मचारियों के साथ फंसे वाहनों में पर्यटकों का पता लगाने का काम शुरु किया। उनका पता लगाने के बाद, सेना ने पहले उन्हें चिकित्सा देखभाल प्रदान की और उन्हें निकटतम सेना शिविरों में पहुँचाया। अधिकारी ने कहा, ‘‘केवल चार घंटों में, सैनिकों ने अपनी जान जोखिम में डालकर सभी फंसे हुए यात्रियों को बाहर निकाला और उन्हें अपने शिविरों और बैरकों में ले गए और उनकी जान बचाई।’’ अधिकारियों ने बताया कि एक महिला, जिसका हाथ फ्रैक्चर था, को कई अन्य लोगों के बीच तत्काल चिकित्सा देखभाल दी गई। महिला को चक्कर आने, सांस फूलने और अन्य उच्च ऊंचाई से संबंधित बीमारियों की शिकायत की थी। सेना की ओर से सभी बचाए गए पर्यटकों को निरंतर बर्फबारी और तापमान के शून्य से नीचे 10 डिग्री सेल्सियस तक जाने के बीच सेना के शिविरों में भोजन, आश्रय और चिकित्सा देखभाल प्रदान की गई। सेना के सूत्रों के अनुसार, इलाके में किसी अन्य पर्यटक का पता लगाने के लिए रात भर बचाव कार्य जारी रहा।

2018 को 3000 से अधिक फंसे हुए पर्यटकों को सेना ने निकाला था
गौरतलब है कि 28 दिसंबर 2018 को सेना ने सिक्किम में किए गए अब तक के सबसे बड़े बचाव अभियान में नाथुला क्षेत्र से 3000 से अधिक फंसे हुए पर्यटकों को निकाला था। वास्तव में बचाये गये पर्यटकों की ओर से भेजे गये संदेशों से सोशल मीडिया भरी पड़ी हुई है जिसमें सेना के प्रति आभार प्रकट करते हुए उनके लिए अपने बैरक तक छोडऩे तथा संकट की घड़ी में भोजन, आश्रय तथा चिकित्सा सुविधा प्रदान करने की भी सराहना की गयी है।  उत्तरी सिक्किम के पुलिस अधीक्षक के डी शंगदार्पा, इलाके के एसडीएम तथा एसडीपीओ भी पर्यटकों को बचाने के सेना के काम में हाथ बंटाने को लेकर मौके पर मौजूद थे।  सिक्किम पुलिस ने एक संदेश में कहा,‘‘कम से कम 50 पर्यटकों को तीसरे सिख रेजिमेंट के शिविर में आश्रय दिया गया तथा सभी सुरक्षित हैं। केवल वाहन फंसे हुए हैं जिन्हें गुरुवार की सुबह रास्ता साफ होने के बाद निकाल लिया जाएगा।’’ अधिकांश पर्यटक मैदानी इलाकों के लोग हैं।

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