चुनाव से पहले छोटे कारोबारियों को बड़ी राहत, खत्म हुई रजिस्ट्रेशन की टेंशन

चुनाव से पहले आज की जीएसटी काउंसिल की अहम बैठक छोटे कारोबारियों को बड़ी राहत मिली है। जीएसटी काउंसिल की बैठक में GST रजिस्ट्रेशन का दायरा बढ़ाने पर सहमति बन गई है। अब 40 लाख रुपए तक के सालाना टर्नओवर पर रजिस्ट्रेशन नहीं कराना होगा। आपको बता दें कि इससे पहले पिछले हफ्ते जीएसटी पर मंत्रियों की एक समिति ने रजिस्ट्रेशन के लिए सालाना टर्नओवर की सीमा बढ़ाने पर सहमति जताई थी। जीएसटी काउंसिल ने कंपोजिशन स्कीम की सीमा बढ़ाने को औपचारिक मंजूरी दे दी। कंपोजिशन स्कीम की सीमा 1.5 करोड़ रुपए करने को मंजूरी मिली, स्कीम पर बदलाव 1 अप्रैल 2019 से लागू होगा।

GST रजिस्ट्रेशन का दायरा बढ़ाने पर बनीसहमति
अब  ₹40 Lk तक सालाना टर्नओवर पर रजिस्ट्रेशन नहीं कराना होगा। अभी 20 लाख रुपए तक बिजनेस वालों के लिए जीएसटी में रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी नहीं है। आपको बता दें कि वित्त राज्य मंत्री शिवप्रताप शुक्ल की अध्यक्षता में पिछले हफ्ते हुई समिति की बैठक में इसको मंजूरी मिल गई थी।

बढ़ाया गया कंपोजीशन स्कीम का दायरा
वहीं सरकार ने गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) के तहत एकीकृत कम्पोजिशन योजना का ऑप्शन चुनने वालो को भी बड़ी राहत दी है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, काउंसिल ने कम्पोजिशन स्कीम में शामिल टैक्स पेयर्स को अब तीन महीने में टैक्स रिटर्न फाइल करने की इज़ाजत दे दी है. वहीं, अब स्कीम का दायरा भी बढ़ाने की तैयारी है. काउंसिल की बैठक में कम्पोजिशन स्कीम की लिमिट बढ़कर 1.5 करोड़ रुपये हो सकती है। आपको बता दें कि दिल्ली में जीएसटी काउंसिल की 32वीं बैठक जारी है। जीएसटी काउंसिलने कंपोजिशन स्कीम की सीमा बढ़ाने को औपचारिक मंजूरी दी. कंपोजिशन स्कीम की सीमा ₹`1.5 Cr करने को मंजूरी मिली, स्कीम पर बदलाव 1 अप्रैल 2019 से लागू होगा।

क्या है जीएसटी कंपोजिशन स्कीम
सरकार ने छोटे कारोबारियों को राहत देने के लिए कंपोजिशन स्कीम शुरू की है। शुरुआती दौर में GST Tax System की तमाम जटिलताओं से राहत देने के लिए सरकार ने छोटे कारोबारियों को कंपोजिशन स्कीमअपनाने का विकल्प दिया। 20 लाख रुपए से ज्यादा के टर्नओवर वाले लोगों के लिए GST रजिस्ट्रेशन तो अनिवार्य है लेकिन वो चाहें तो जीएसटी का झंझट कम कर सकते हैं। साल में 75 लाख तक का कारोबार करने वाले जीएसटी कंपोजिशन स्कीम का फायदा उठा सकते हैं. अपनी सुविधानुसार वे चाहें तो जीएसटी की नॉर्मल स्कीम के तहत काम करें, चाहें तो कंपोजिशन स्कीम के तहत। इसके तहत छोटे कारोबारियों को हर महीने रिटर्न फाइल नहीं करना होता है. साथ ही, टैक्स का एक निश्चित रेट, एकमुश्त टैक्स भरना होता है। इसके अलावा रसीदों को अपलोड करना का झंझट भी नहीं है।

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